पीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा, आँखों का सफेद हिस्सा और कभी-कभी नाखून भी पीले दिखाई देने लगते हैं। समय रहते पीलिया के शुरुआती लक्षण पहचान लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही गंभीर लिवर समस्या में बदल सकती है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि पीलिया क्या होता है, पीलिया क्यों होता है, इसके प्रकार क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
पीलिया क्या होता है?
पीलिया तब होता है जब खून में बिलीरुबिन की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। बिलीरुबिन लाल ब्लड सेल्स के टूटने से बनता है और आमतौर पर लिवर इसे प्रोसेस करके शरीर से बाहर निकाल देता है।
अगर लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा हो या बाइल डक्ट्स में रुकावट हो, तो बिलीरुबिन शरीर में जमा होने लगता है। यही कारण है कि त्वचा और आँखें पीली पड़ जाती हैं।
पीलिया क्यों होता है?
पीलिया के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन)
- लिवर सिरोसिस
- बाइल डक्ट में रुकावट
- बाइल डक्ट की पथरी
- अधिक शराब का सेवन
- कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
- नवजात बच्चों में कमज़ोर लिवर
यदि लंबे समय तक पेट दर्द, उल्टी, भूख ना लगे या कमज़ोरी बनी रहे, तो ये लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें - पीलिया को समझना: लक्षण, कारण, और स्पेशलिस्ट को कब दिखाना चाहिए
पीलिया के प्रकार
पीलिया के तीन प्रमुख प्रकार हैं:
- प्री-हेपेटिक पीलिया: ये तब होता है जब लाल ब्लड सेल्स तेज़ी से टूटती हैं और लिवर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है।
- हेपेटिक पीलिया: ये लिवर की बीमारी के कारण होता है, जैसे हेपेटाइटिस या सिरोसिस।
- पोस्ट-हेपेटिक पीलिया: जब बाइल डक्ट में रुकावट आती है (जैसे पथरी या ट्यूमर), तब ये पीलिया होता है।
सही प्रकार की पहचान के लिए दिल्ली एनसीआर में अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना आवश्यक है।
पीलिया के लक्षण
पीलिया के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और ये आमतौर पर लिवर, बाइल डक्ट या खून से जुड़ी किसी अंदर की समस्या का संकेत होता है।
नीचे दिए गए कारणों को समझना जरूरी है, ताकि समय रहते सही जाँच और उपचार कराया जा सके:
- आँखों का पीला होना
- त्वचा का रंग बदलना
- थकान और कमज़ोरी
- भूख कम लगना
- हल्का बुखार
- गहरे रंग का पेशाब
इन संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
बच्चों में पीलिया के लक्षण
बच्चों में पीलिया के लक्षण अलग तरीके से दिखाई देते हैं:
- नवजात में त्वचा का पीला होना
- दूध कम पीना
- सुस्ती
- लगातार रोना
- वजन ना बढ़ना
बच्चों में पीलिया अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए समय पर नोएडा में सबसे अच्छा गैस्ट्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है।
पीलिया में आँखें और त्वचा पीली क्यों हो जाती हैं?
जब खून में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ती है, तो ये त्वचा और आँखों की टिशूज़ में जमा होने लगता है। क्यूँकि बिलीरुबिन का रंग पीला है, इसलिए शरीर का रंग भी पीला दिखने लगता है।
ये शरीर का संकेत है कि लिवर सही तरीके से काम नहीं कर पा रहा है।
पीलिया का उपचार
पीलिया का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। पीलिया खुद बीमारी नहीं है पर लिवर या बाइल से जुड़ी समस्या का संकेत है। इसलिए सही जाँच के बाद ही उपचार तय किया जाता है।
पीलिया के कुछ सामान्य उपचार निम्न दिए गए हैं:
- वायरल हेपेटाइटिस में आराम, हल्का भोजन और समय पर जाँच से 2–4 सप्ताह में सुधार हो सकता है।
- बाइल डक्ट की पथरी या रुकावट होने पर एंडोस्कोपिक प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
- गंभीर लिवर रोग में दवाएँ, विशेष डाइट और देखभाल जरूरी होती है।
- बच्चों में पीलिया अधिक होने पर फोटोथेरेपी दी जाती है।
सही उपचार के लिए दिल्ली एनसीआर में अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है।
पीलिया में क्या खाना चाहिए?
पीलिया से जल्दी ठीक होने के लिए ये खाएँ:
- हल्का और जल्दी पचने वाला खाना
- दाल का पानी
- खिचड़ी
- नारियल पानी
- गन्ने का रस
- ताज़े फल (पपीता, सेब)
- पर्याप्त पानी
पीलिया में किन चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए?
पीलिया में ये खाना ना खाएँ:
- तला-भुना खाना
- मसालेदार भोजन
- शराब
- जंक फूड
- अधिक तेल और घी
संतुलित आहार लिवर को ठीक होने में मदद करता है।
पीलिया कितने समय में ठीक होता है?
ये उसके कारण पर निर्भर करता है। सामान्य वायरल पीलिया 2–4 सप्ताह में ठीक हो जाता है, जबकि गंभीर लिवर रोग में अधिक समय लग सकता है।
अगर लक्षण 2 हफ्तों से ज़्यादा बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि पीलिया के लक्षण बढ़ने लगें या सामान्य कमज़ोरी से अधिक गंभीर संकेत दिखाई दें, तो देरी करना खतरनाक हो सकता है।
ये संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- लगातार उल्टी होना
- तेज़ बुखार
- पेट में ज़ोर से दर्द
- ज़्यादा कमज़ोरी होना
- बच्चे का दूध ना पीना
ऐसे में दिल्ली में सबसे अच्छा गैस्ट्रो हॉस्पिटल से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।
निष्कर्ष
पीलिया एक चेतावनी संकेत है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर जाँच और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
अगर आपको लिवर से जुड़ी कोई समस्या है, तो सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद में सबसे अच्छा गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलें और सही जाँच और इलाज कराएँ। यहाँ आधुनिक जाँच सुविधाएँ और अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो मरीज की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना प्रदान करते हैं। सर्वोदय भारत में सबसे अच्छा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अस्पताल भी माना जाता है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लें।