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हाथ-पैर सुन्न होने के कारण: शुरुआती संकेत, जाँच और इलाज

हाथ-पैर सुन्न होने के कारण: शुरुआती संकेत, जाँच और इलाज

कभी देर तक बैठे रहने से पैरों में झुनझुनी होने लगती है, तो कभी सुबह उठने पर हाथ सुन्न लगता है। ऐसा अक्सर हाथ या पैर की नस पर कुछ देर दबाव पड़ने से होता है। बैठने या सोने की पोज़िशन बदलने पर यह परेशानी कम हो सकती है।

लेकिन अगर ऐसा बार-बार हो, तो इसे सिर्फ़ थकान समझकर नज़रअंदाज़ ना करें। हाथ-पैर सुन्न होने के कारण कई हो सकते हैं, जैसे डायबिटीज, विटामिन की कमी या नस पर दबाव। सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से जाँच कराना ज़रूरी है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि हाथ-पैर क्यों सुन्न होते हैं, कब तुरंत डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए और इसकी जाँच और इलाज कैसे होते हैं।

सुन्नपन और झुनझुनी को समझें

नसें शरीर और दिमाग़ के बीच संदेश पहुँचाने का काम करती हैं। नसों पर दबाव पड़ने या उन्हें नुक़सान पहुँचने से छूने, दर्द या गर्म-ठंडे का एहसास कम हो सकता है।

सुन्नपन में शरीर के किसी हिस्से को छूने पर कम महसूस होता है। वहीं, हाथ-पैर में झुनझुनी होने पर सुइयाँ चुभने या चींटियाँ चलने जैसा लग सकता है। सुन्नपन और झुनझुनी एक साथ भी हो सकते हैं।

हाथ-पैर सुन्न होने के कारण

हाथ-पैर सुन्न होने की वजह हर मरीज़ में अलग हो सकती है। सुन्नपन कहाँ होता है, कब शुरू हुआ और कितनी देर रहता है, यह जानकर डॉक्टर को इसकी वजह समझने में मदद मिलती है।

इसके कुछ सामान्य कारण हैं:

  • नस पर कुछ देर दबाव पड़ना: पैर मोड़कर बैठने या हाथ पर सिर रखकर सोने से नस दब सकती है। पोज़िशन बदलने पर सुन्नपन कम हो सकता है।
  • डायबिटिक न्यूरोपैथी: डायबिटीज से नसों को नुक़सान पहुँच सकता है। इससे होने वाला सुन्नपन अक्सर पैरों से शुरू होता है और दोनों पैरों में हो सकता है।
  • विटामिन बी12 की कमी: नसों को ठीक से काम करने के लिए इस विटामिन की ज़रूरत होती है। इसकी कमी से हाथ-पैर सुन्न हो सकते हैं या चलते समय बैलेंस बनाने में परेशानी हो सकती है।
  • गर्दन की समस्या: गर्दन की हड्डियों और डिस्क में घिसावट से नस पर दबाव पड़ सकता है। इससे हाथ सुन्न हो सकते हैं। इस स्थिति को सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस कहते हैं।
  • स्लिप डिस्क: डिस्क के खिसकने या बाहर उभरने से पास की नस दब सकती है। स्लिप डिस्क के लक्षण में दर्द और हाथ या पैर में सुन्नपन शामिल हो सकते हैं।
  • अन्य वजहें: कुछ दवाएँ, ज़्यादा शराब पीना और थायरॉइड या किडनी की कुछ बीमारियाँ भी नसों के काम पर असर डाल सकती हैं।

सुन्नपन के साथ दिखने वाले लक्षण

हाथ-पैर सुन्न होने के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। किसी को छूने पर कम महसूस होता है, तो किसी को झनझनाहट या भारीपन लगता है।

सुन्नपन के साथ इन परेशानियों पर भी ध्यान दें:

  • हाथ-पैर में जलन, ख़ासकर रात में।
  • हाथ-पैर में कमज़ोरी या चीज़ें पकड़ने में दिक़्क़त।
  • चलते समय बैलेंस बिगड़ना।
  • पैरों में चोट लगने या गर्म चीज़ छूने पर कम महसूस होना।

अगर आपको डायबिटीज है, शरीर में पोषक तत्वों की कमी है या आप ज़्यादा शराब पीते हैं, तो इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ ना करें। बार-बार शरीर में झुनझुनी हो, तो वजह जानने के लिए फरीदाबाद में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट से जाँच कराएँ।

तुरंत अस्पताल जाने वाले संकेत

शरीर के एक तरफ़ हाथ, पैर या चेहरे में अचानक सुन्नपन होना स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण में से एक हो सकता है। नीचे दिए बदलाव भी ब्रेन स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं:

  • चेहरे का एक हिस्सा लटकना या मुस्कुराते समय एक तरफ़ कम हिलना।
  • अचानक बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी।
  • अचानक ठीक से दिखाई ना देना या चलते समय बैलेंस बिगड़ना।
  • बिना किसी साफ़ वजह के अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द होना।

ऐसा होने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएँ। लक्षण कब शुरू हुए, इसका समय याद रखें और ख़ुद गाड़ी ना चलाएँ। लक्षण अपने आप ठीक हो जाएँ, तब भी तुरंत अस्पताल में जाँच कराएँ। समय पर स्ट्रोक उपचार मिलने से कुछ मरीज़ों में दिमाग़ को होने वाला नुक़सान कम किया जा सकता है।

कमर दर्द और सुन्नपन के साथ पेशाब या मल रोकने में परेशानी हो, पेशाब ना निकल पाए या जाँघों के बीच का हिस्सा सुन्न लगे, तो भी तुरंत अस्पताल जाएँ।

सुन्नपन की वजह जानने के लिए जाँच

डॉक्टर आपसे लक्षणों, पहले से मौजूद बीमारियों और ली जा रही दवाओं के बारे में पूछेंगे। वे हाथ-पैर की ताक़त, छूने का एहसास और रिफ़्लेक्स भी जाँचेंगे। इससे नसों की कमज़ोरी जैसी परेशानी की वजह समझने में मदद मिलती है।

ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर ये जाँचें सुझा सकते हैं:

  • ख़ून की जाँच: शुगर और विटामिन बी12 का स्तर देखने के लिए। ज़रूरत हो, तो थायरॉइड और किडनी की जाँच भी की जा सकती है।
  • एनसीवी टेस्ट: नसों से संदेश कितनी तेज़ी से और कितनी अच्छी तरह गुज़रते हैं, यह जाँचने के लिए।
  • ईएमजी टेस्ट: मांसपेशियों में बनने वाले बिजली के संकेत जाँचने के लिए। इससे नसों या मांसपेशियों की समस्या समझने में मदद मिलती है।
  • एमआरआई ब्रेन: डॉक्टर को दिमाग़ से जुड़ी किसी समस्या का शक होने पर यह स्कैन किया जा सकता है। गर्दन या कमर की समस्या हो, तो उस हिस्से की एमआरआई कराई जा सकती है।

हर मरीज़ को सभी टेस्ट की ज़रूरत नहीं होती। स्ट्रोक का शक होने पर तुरंत सीटी स्कैन या दूसरे स्कैन की ज़रूरत पड़ सकती है।

इलाज और रोज़मर्रा की देखभाल

हाथ-पैर में सुन्नपन का इलाज उसकी वजह के अनुसार किया जाता है। डॉक्टर शुगर को क़ाबू में रखने, विटामिन की कमी दूर करने या नसों का दर्द कम करने के लिए इलाज सुझा सकते हैं। कुछ मरीज़ों को फ़िज़ियोथेरेपी से भी मदद मिल सकती है।

रोज़मर्रा में इन बातों का ध्यान रखें:

  • लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में ना बैठें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार चलें-फिरें और व्यायाम करें।
  • डायबिटीज हो, तो रोज़ देखें कि पैरों में कोई कट, छाला या घाव तो नहीं है।
  • सुन्न हिस्से पर गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड ना रखें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना ज़्यादा मात्रा में विटामिन ना लें।
  • अगर लगे कि किसी दवा से परेशानी हो रही है, तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट से बात करें। दवा अपने आप बंद ना करें।

निष्कर्ष

हाथ-पैर सुन्न होने के कारण कई हो सकते हैं, जैसे नस पर दबाव या नसों से जुड़ी कोई बीमारी। परेशानी बनी रहे या बढ़ने लगे, तो जाँच कराएँ। अचानक सुन्नपन के साथ बोलने या चलने में परेशानी हो, तो तुरंत अस्पताल जाएँ।

सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद, भारत में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजी अस्पताल, के न्यूरोलॉजी विभाग में दिमाग़, रीढ़ और नसों से जुड़ी समस्याओं की जाँच और इलाज की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ विशेषज्ञ से बीमारी का ख़तरा कम करने और रोज़मर्रा की देखभाल के बारे में भी सलाह ले सकते हैं।

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FAQs

नस पर दबाव, डायबिटीज और विटामिन बी12 की कमी इसकी सामान्य वजहें हैं। सही वजह डॉक्टर जाँच के बाद बता सकते हैं।

हाँ, शरीर के एक तरफ़ अचानक सुन्नपन होना स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसा होने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएँ।

झुनझुनी में सुइयाँ चुभने जैसा लगता है। सुन्नपन में उस हिस्से को छूने पर कम महसूस होता है।

हाँ, डायबिटीज से नसों को नुक़सान पहुँच सकता है, जिससे हाथ-पैर सुन्न हो सकते हैं। नसों की इस समस्या को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं।

नसों को ठीक से काम करने के लिए विटामिन बी12 चाहिए। इसकी कमी नसों की सुरक्षा परत को नुक़सान पहुँचा सकती है, जिससे सुन्नपन हो सकता है।

अचानक सुन्नपन या कमज़ोरी हो, ख़ासकर शरीर के एक तरफ़, तो तुरंत अस्पताल जाएँ। बोलने, देखने या चलने में अचानक परेशानी भी तुरंत मदद लेने का संकेत है।

हाँ, गर्दन की समस्या में नस दबने से हाथ सुन्न हो सकते हैं। हालाँकि, उम्र के साथ होने वाली घिसावट को सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस कहते हैं; स्पॉन्डिलाइटिस अलग स्थिति है।

मथुरा में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट हाथ-पैर की ताक़त, छूने का एहसास और रिफ़्लेक्स जाँचते हैं। वजह समझने के लिए कुछ टेस्ट भी सुझा सकते हैं।

डॉक्टर ख़ून की जाँच, एनसीवी टेस्ट या ईएमजी टेस्ट सुझा सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर एमआरआई जैसे स्कैन भी कराए जा सकते हैं।

नहीं, पैर सुन्न होना कुछ देर नस पर दबाव पड़ने से भी हो सकता है। लेकिन परेशानी बार-बार हो या बनी रहे, तो जाँच कराएँ।

Dr. Prince Agrawal | Neurology,Neurosciences | Sarvodaya Hospital

Dr. Prince Agrawal
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