कैंसर का पता चलने पर मरीज़ और परिवार के सामने कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसे कई नाम आते हैं। हर इलाज का तरीक़ा अलग है।
कई लोगों को लगता है कि कीमोथेरेपी ज़रूर दी जाएगी या नई थेरेपी हर मरीज़ के लिए बेहतर होगी। एक ही अंग में हुए कैंसर में भी इलाज अलग हो सकता है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी में क्या अंतर है (Chemotherapy, Immunotherapy Aur Targeted Therapy Mein Kya Antar Hai) और डॉक्टर मरीज़ के लिए सही इलाज कैसे चुनते हैं।
कीमोथेरेपी क्या है और कैसे काम करती है?
इसमें दवाएँ कैंसर सेल्स को ख़त्म करती हैं या उनकी बढ़त रोकती हैं। ये शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच सकती हैं।
डॉक्टर कीमोथेरेपी दे सकते हैं:
- ऑपरेशन से पहले: गाँठ छोटी करने के लिए।
- ऑपरेशन के बाद: बची हो सकने वाली कैंसर सेल्स पर असर करने के लिए।
- मुख्य इलाज के रूप में: बीमारी की बढ़त या उससे होने वाली परेशानी कम करने के लिए।
दवाएँ नस के रास्ते या गोलियों में दी जा सकती हैं। अक्सर इलाज के चरणों के बीच शरीर को रिकवर होने का समय मिलता है। अवधि मरीज़ के अनुसार बदलती है।
इम्यूनोथेरेपी क्या है और किसे दी जा सकती है?
ये शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद करती है। कुछ कैंसर सेल्स उसकी पहचान से बच निकलती हैं। इस थेरेपी की कुछ दवाएँ इम्यून सिस्टम की राह में आने वाली रुकावटें हटाती हैं।
इम्यूनोथेरेपी कैंसर उपचार (Immunotherapy Cancer Upchar) के रूप में कुछ प्रकार के फेफड़ों, त्वचा और किडनी के कैंसर में दी जा सकती है। डॉक्टर रिपोर्ट, स्टेज और स्वास्थ्य स्थिति देखते हैं। ख़ास जाँच भी इलाज चुनने में मदद करती है। इसे अकेले या दूसरे इलाज के साथ दिया जा सकता है। आगे की जाँच से पता चलता है कि इसे जारी रखना उचित है या नहीं।
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टारगेटेड थेरेपी क्या है और किसे दी जाती है?
कुछ कैंसर सेल्स में ख़ास बदलाव उन्हें बढ़ने में मदद करते हैं। इसकी दवाएँ इन बदलावों या संबंधित प्रोटीन पर असर करके कैंसर की बढ़त धीमी कर सकती हैं।
डॉक्टर बायोप्सी से लिया नमूना जाँचते हैं। इसमें प्रभावित हिस्से से थोड़ा ऊतक लिया जाता है। कुछ मरीज़ों में बायोमार्कर टेस्ट से ऐसे बदलाव खोजे जाते हैं जिनके लिए ख़ास दवा उपलब्ध हो। बदलाव मिलने पर भी दवा की उपयुक्तता जाँची जाती है। हर टारगेटेड दवा हर कैंसर पर काम नहीं करती। ये गोली या नस के रास्ते दी जा सकती है। ऑन्कोलॉजिस्ट रिपोर्ट को बाकी जाँचों के साथ पढ़ते हैं।
कीमोथेरेपी इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी में अंतर
कैंसर उपचार के प्रकार कई हैं।
इन तीनों का असर अलग-अलग तरह से होता है:
- कीमोथेरेपी: तेज़ी से बढ़ने वाली सेल्स को ख़त्म करती है या उनकी बढ़त रोकती है। इसका असर कुछ स्वस्थ सेल्स पर भी पड़ सकता है।
- इम्यूनोथेरेपी: शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद करती है।
- टारगेटेड थेरेपी: कैंसर को बढ़ने में मदद करने वाले ख़ास बदलावों या प्रोटीन पर असर करती है।
कैंसर की नई थेरेपी भी हर मरीज़ के लिए सही नहीं होती। चुनाव जाँच के आधार पर होता है।
डॉक्टर सही इलाज कैसे चुनते हैं?
कैंसर का इलाज चुनने से पहले मथुरा में ऑन्कोलॉजिस्ट रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति देखते हैं।
केवल लक्षणों से कैंसर की पुष्टि नहीं होती; इनके दूसरे कारण भी हो सकते हैं:
- प्रकार और स्टेज: कैंसर कहाँ है और कितना फैला है।
- बायोप्सी: कैंसर की पुष्टि और उसके प्रकार की जानकारी।
- बायोमार्कर टेस्ट: किसी ख़ास दवा के चयन में मदद।
- स्वास्थ्य स्थिति: अन्य बीमारियाँ, प्रमुख अंगों (किडनी, लिवर आदि) की कार्यक्षमता और पहले हुए इलाज।
- इलाज का उद्देश्य: कैंसर को ख़त्म करना, उसकी बढ़त रोकना या परेशानी कम करना।
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इन इलाजों के साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं?
साइड इफेक्ट दवा और मरीज़ की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलते हैं:
- कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट: थकान, मतली, मुँह में छाले, बाल झड़ना और संक्रमण का ख़तरा बढ़ना शामिल हो सकते हैं।
- इम्यूनोथेरेपी: थकान, त्वचा पर दाने या दस्त हो सकते हैं। कुछ मरीज़ों में इम्यून सिस्टम स्वस्थ अंगों में भी सूजन पैदा कर सकता है।
- टारगेटेड थेरेपी: दवा के अनुसार त्वचा पर दाने, दस्त, थकान या ब्लड प्रेशर बढ़ना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
नई परेशानी की जानकारी डॉक्टर को दें। बुख़ार, साँस की तकलीफ़ या गंभीर दस्त पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। दवा अपने आप बंद ना करें।
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से कब मिलें?
कैंसर की पुष्टि होने पर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लें।
कैंसर दोबारा मिलने पर भी नई योजना की ज़रूरत हो सकती है। अपनी रिपोर्ट साथ ले जाएँ।
निष्कर्ष
कीमोथेरेपी इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी में अंतर (Chemotherapy, Immunotherapy Aur Targeted Therapy Mein Antar) समझकर इलाज के बारे में सवाल पूछें। समय पर जाँच से उचित योजना बनाने में मदद मिलती है।
सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद, भारत में सर्वोत्तम चिकित्सा कैंसर विज्ञान अस्पताल, का मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग जाँच, इलाज की योजना, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड इलाज की सुविधा देता है। वहाँ कैंसर की समय पर पहचान और बचाव से जुड़ी सलाह भी ली जा सकती है।
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