ज़्यादातर लोगों को लगता है कि स्ट्रोक अचानक आता है, लेकिन असल में हमारा शरीर स्ट्रोक आने से कुछ समय पहले ही हमें चेतावनी देने लगता है। अगर हम स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण को समय रहते पहचान लें, तो मरीज़ की जान बचाई जा सकती है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण क्या होते हैं और इमरजेंसी में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।
ब्रेन स्ट्रोक क्या होता है?
हमारे मस्तिष्क को सही तरीके से काम करने के लिए निरंतर ऑक्सीजन और खून की आवश्यकता होती है। जब किसी कारणवश मस्तिष्क की नसों में ब्लॉकेज आ जाता है (इस्केमिक स्ट्रोक) या कोई नस फट जाती है (हेमरेजिक स्ट्रोक), तो मस्तिष्क का वह हिस्सा काम करना बंद कर देता है। इसके कारण शरीर के जिन अंगों को मस्तिष्क का वह हिस्सा नियंत्रित करता है, वे भी काम करना बंद कर देते हैं।
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ब्रेन स्ट्रोक के 5 शुरुआती लक्षण
स्ट्रोक के दौरान हर एक सेकंड कीमती होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक के 5 शुरुआती लक्षण होते हैं, जिन्हें किसी भी स्थिति में नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:
- चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन या कमजोरी: ये स्ट्रोक के सबसे आम लक्षण हैं। इसमें अचानक शरीर के एक हिस्से (आमतौर पर एक तरफ) में भारीपन या सुन्नपन महसूस होता है। मरीज़ को मुस्कुराने में या दोनों हाथ उठाने में दिक्कत हो सकती है।
- बोलने और समझने में परेशानी: मरीज़ की आवाज़ अचानक लड़खड़ाने लगती है। वह स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाता और दूसरों की बातों को समझने में भी कंफ्यूज़ महसूस करता है।
- आँखों की रोशनी में अचानक बदलाव: एक या दोनों आँखों से धुंधला दिखाई देना, या अचानक से आँखों के सामने अंधेरा छा जाना भी ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों में शामिल हैं।
- चलने में अचानक दिक्कत या चक्कर आना: बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक चक्कर आना, संतुलन खो देना या चलने में लड़खड़ाहट महसूस होना स्ट्रोक का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
- अचानक और भयंकर सिरदर्द: बिना किसी पुराने कारण के ऐसा सिरदर्द होना जो अब तक का सबसे भयंकर सिरदर्द लगे, साथ ही उल्टी आना या बेहोशी आना हेमरेजिक स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण कितने दिन पहले दिखते हैं?
कई बार लोग अक्सर यह पूछते हैं कि स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण कितने दिन पहले दिखते हैं? ज़्यादातर मरीज़ों में स्ट्रोक के लक्षण एक हफ्ते (लगभग 7 दिन) पहले ही दिखने शुरू हो जाते हैं। इसे 'मिनी स्ट्रोक' या ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (टी.आई.ए) कहा जाता है।
मिनी स्ट्रोक में खून का बहाव कुछ ही मिनटों के लिए रुकता है और फिर ठीक हो जाता है। इसके लक्षण कुछ मिनट या घंटों तक रहते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। लोग अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन ये इस बात की सबसे बड़ी चेतावनी है कि आने वाले दिनों में एक बड़ा और जानलेवा स्ट्रोक आ सकता है।
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स्ट्रोक के खतरे को कैसे पहचानें? (FAST टेस्ट)
स्ट्रोक की तुरंत पहचान करने के लिए 'FAST' तकनीक को याद रखना चाहिए:
- F (Face - चेहरा): व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें। क्या चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है?
- A (Arms - बाँह): व्यक्ति को दोनों हाथ उठाने के लिए कहें। क्या एक हाथ नीचे की तरफ गिर रहा है?
- S (Speech - बोली): व्यक्ति को कोई साधारण वाक्य बोलने के लिए कहें। क्या उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही है?
- T (Time - समय): अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना एक मिनट बर्बाद किए तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं।
स्ट्रोक आने पर तुरंत क्या करें?
ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय शांति और सूझबूझ से काम लेना ज़रूरी है।
एम्बुलेंस के आने या अस्पताल पहुँचने तक आप ये प्राथमिक कदम उठा सकते हैं:
- तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर मरीज़ को एक करवट लेटा दें।
- मरीज़ के कपड़े ढीले कर दें ताकि उसे साँस लेने में आसानी हो।
- अगर उसे उल्टी आ रही है, तो उसका सिर एक तरफ घुमा दें ताकि उल्टी साँस की नली में ना जाए।
- मरीज़ को खाने या पीने के लिए कुछ भी ना दें, इससे दम घुटने का खतरा हो सकता है।
- बिना कोई घरेलू नुस्खा आज़माए, तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाएं।
स्ट्रोक से बचाव के उपाय
अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें: हाई बीपी स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। नियमित जाँच कराएं।
- मधुमेह (डायबिटीज़) को कंट्रोल करें: हाई ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुँचाता है।
- स्वस्थ आहार लें: ताज़े फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज खाएं। नमक और जंक फूड का सेवन कम करें।
- नियमित व्यायाम करें: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट टहलना या योग करना फायदेमंद है।
- धूम्रपान और शराब से बचें: ये दोनों ही ब्लड वेसल्स को सिकोड़कर स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं।
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निष्कर्ष
अगर स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण को समय पर पहचान लिया जाए, तो गंभीर समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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यदि आपको ऐसे कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। सही देखभाल के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।