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फिस्टुला क्यों होता है: लक्षण, निदान और प्रभावी

फिस्टुला क्यों होता है: लक्षण, निदान और प्रभावी

फिस्टुला को लोग अक्सर नज़रअंदाज़ करते हैं। शुरुआत में हल्का दर्द, सूजन या पस निकलने जैसी परेशानी दिखाई देती है, लेकिन समय पर इलाज ना मिलने पर ये गंभीर रूप ले सकती है।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि फिस्टुला क्यों होता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं, और फिस्टुला का इलाज क्या है।

फिस्टुला क्या होता है?

फिस्टुला गुदा (एनस) के अंदर की नली और बाहर की त्वचा के बीच बनने वाली एक असामान्य सुरंग है। ये सुरंग आमतौर पर किसी संक्रमण या फोड़े के बाद बनती है। जब एनल सैक में संक्रमण होता है और वह ठीक से भर नहीं पाता, तो अंदर से बाहर तक एक रास्ता बन जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में एनल फिस्टुला कहा जाता है।

यदि समय पर फिस्टुला का इलाज ना कराया जाए तो ये बार-बार पस निकलने, दर्द और सूजन का कारण बन सकता है।

फिस्टुला क्यों होता है? इसके मुख्य कारण क्या हैं?

आमतौर पर फिस्टुला का मुख्य कारण संक्रमण है, लेकिन कुछ अन्य कारण से भी फिस्टुला हो सकता है।

फिस्टुला क्यों होता है के प्रमुख कारण निम्न हैं:

  • एनल सैक में बैक्टीरियल संक्रमण
  • बार-बार एनल एब्सेस (फोड़ा) होना
  • क्रोह्न डिज़ीज़ जैसे आंतों की सूजन संबंधी बीमारी
  • टीबी संक्रमण
  • एनल एरिया में चोट या पूर्व सर्जरी
  • अनियंत्रित डायबिटीज

फिस्टुला के लक्षण क्या होते हैं?

कई बार लोग फिस्टुला को सामान्य फोड़ा समझकर घरेलू उपचार करते हैं, जबकि अंदर ही अंदर संक्रमण बढ़ता रहता है। इसलिए फिस्टुला के लक्षण को पहचानना बहुत आवश्यक है।

आमतौर पर फिस्टुला के लक्षण हैं:

  • गुदा के आसपास लगातार दर्द या जलन
  • बैठने या चलने में असहजता
  • गुदा के पास सूजन या कठोर गांठ
  • पस या खून का बहना
  • बार-बार फोड़ा बनना
  • हल्का बुखार या कमज़ोरी
अंग्रेजी में भी पढ़ें -एनल फिस्टुला के बारे में जानें: लक्षण, कारण, इलाज और सर्जरी के ऑप्शन


क्या फिस्टुला कैंसर के लक्षण हो सकते हैं?

सामान्य रूप से देखा जाए तो फिस्टुला और कैंसर अलग-अलग स्थितियाँ हैं। अधिकतर मामलों में फिस्टुला संक्रमण के कारण होता है, ना कि कैंसर के कारण। हालांकि, लंबे समय तक बिना इलाज के रहने वाला पुराना फिस्टुला दुर्लभ मामलों में कई समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि घाव लंबे समय तक ठीक ना हो, लगातार खून आए या असामान्य ऊतक वृद्धि (टिश्यू ग्रोथ) दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

इसलिए यदि किसी मरीज़ को लगातार परेशानी हो रही है और वह सोच रहा है कि क्या ये फिस्टुला कैंसर के लक्षण हैं, तो घबराने के बजाय जाँच कराना सबसे सुरक्षित कदम है। समय पर फिस्टुला का इलाज कराने से समस्याओं से बचा जा सकता है।

फिस्टुला की जाँच कैसे की जाती है?

विशेषज्ञ डॉक्टर पहले मरीज़ की पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं और फिर शारीरिक परीक्षण करते हैं।

फिस्टुला की पुष्टि करने के लिए निम्न जाँचें की जा सकती हैं:

  • शरीर के पीछे की शारीरिक जाँच
  • एमआरआई (MRI) से अंदर की सुरंग की स्पष्ट तस्वीर
  • अल्ट्रासाउंड या एंडोस्कोपिक जाँच
  • प्रोक्टोस्कोपी द्वारा अंदरूनी निरीक्षण
  • आवश्यक होने पर ब्लड टेस्ट

फिस्टुला (भगंदर) का सबसे असरदार इलाज क्या है?

आधुनिक चिकित्सा में अब कई उन्नत तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से सुरक्षित और कम दर्द में फिस्टुला का इलाज किया जा सकता है।

मरीज़ की स्थिति और फिस्टुला की गहराई के आधार पर निम्न उपचार विकल्प अपनाए जाते हैं:

  • फिस्टुलोटॉमी: इसमें संक्रमित सुरंग को खोलकर साफ किया जाता है ताकि वह अंदर से ठीक हो सके।
  • लेज़र सर्जरी: आधुनिक और कम दर्द वाली तकनीक, जिसमें लेज़र से सुरंग को बंद किया जाता है।
  • LIFT प्रक्रिया: इसमें फिस्टुला ट्रैक्ट को सुरक्षित बंद किया जाता है।
  • सेटन तकनीक: गंभीर मामलों में संक्रमण को धीरे-धीरे नियंत्रित करने के लिए धागा डाला जाता है।

फिस्टुला का ऑपरेशन कैसे होता है और इसमें कितना समय लगता है?

ये प्रक्रिया आमतौर पर एनेस्थीसिया के तहत की जाती है ताकि मरीज़ को दर्द महसूस ना हो। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर संक्रमित सुरंग को हटाते या बंद करते हैं, जिससे संक्रमण का जड़ से इलाज होता है। आमतौर पर फिस्टुला का ऑपरेशन कैसे होता है ये उसकी जटिलता पर निर्भर करता है, लेकिन अधिकतर मामलों में ये 30 से 60 मिनट के भीतर पूरा हो जाता है।

ज़्यादातर ये डे-केयर प्रक्रिया होती है, यानी मरीज़ उसी दिन घर जा सकता है। सही देखभाल और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करने से रिकवरी तेज़ होती है और दोबारा समस्या होने की संभावना कम हो जाती है।

निष्कर्ष

यदि समय पर फिस्टुला के लक्षण पहचाने जाएँ और सही उपचार लिया जाए, तो ये पूरी तरह ठीक हो सकता है। देरी करने से संक्रमण बढ़ सकता है और समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद, में अनुभवी विशेषज्ञों की टीम आधुनिक तकनीकों से भगंदर का इलाज करते हैं। यहां उन्नत लेज़र सर्जरी, सुरक्षित प्रक्रियाएँ और व्यक्तिगत देखभाल उपलब्ध है। यहाँ आप दिल्ली एनसीआर में सबसे अच्छे जनरल सर्जन से भी परामर्श ले सकते हैं। साथ ही, समय पर ली गई सलाह भविष्य की समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यदि आपको एनल एरिया में दर्द, सूजन या पस जैसी समस्या हो रही है, तो इसे अनदेखा ना करें और सर्वोदय में अपॉइंटमेंट बुक करें। सही समय पर जाँच और उपचार ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

FAQs

ज़्यादातर मामलों में फिस्टुला सर्जरी से ठीक होता है। दवाइयाँ संक्रमण को कुछ समय के लिए कम कर सकती हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सर्जिकल प्रक्रिया आवश्यक है।

ये गुदा के अंदर और बाहर की त्वचा के बीच बनी असामान्य सुरंग है, जो आमतौर पर संक्रमण या फोड़े के बाद बनती है।

ये फिस्टुला की गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर एनेस्थीसिया के तहत संक्रमित सुरंग को हटाया या बंद किया जाता है। इस प्रक्रिया में 30 से 60 मिनट लगते हैं।

इसका मुख्य कारण एनल सैक में संक्रमण या बार-बार फोड़ा होना है। कुछ मामलों में क्रोह्न डिज़ीज़, टीबी या डायबिटीज भी कारण बन सकते हैं।

फिस्टुला के लक्षण में गुदा के पास दर्द, सूजन, पस निकलना और बार-बार फोड़ा बनना शामिल है।

सामान्यतः फिस्टुला कैंसर के लक्षण नहीं होते, लेकिन लंबे समय तक बिना इलाज के रहने पर दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसलिए समय पर जाँच जरूरी है।

भगंदर का सबसे प्रभावी इलाज सर्जिकल प्रक्रिया है, जैसे फिस्टुलोटॉमी या लेज़र सर्जरी। विशेषज्ञ सही उपचार का चयन करने में सहायता करते हैं।

इलाज ना कराने पर संक्रमण बढ़ सकता है, दर्द लगातार बना रहता है और फिस्टुला गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए समय पर फिस्टुला का इलाज आवश्यक है।

Dr. Arjun Goel | Minimally Invasive  & Laparoscopic Surgery ,Institute of Robotic Surgery,Robotic Minimally Invasive Surgery | Sarvodaya Hospital

Dr. Arjun Goel
Senior Consultant & Head (Unit II) – General & Minimally Invasive Surgery

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