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कैंसर के शुरुआती लक्षण: सामान्य लगने वाले इन संकेतों को नज़रअंदाज़ ना करें

कैंसर के शुरुआती लक्षण: सामान्य लगने वाले इन संकेतों को नज़रअंदाज़ ना करें

कैंसर की पहचान जल्दी होने पर जाँच और इलाज समय पर शुरू किया जा सकता है। फिर भी कुछ कैंसर के शुरुआती लक्षण थकान, अपच या सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं।

हर गाँठ, खाँसी या वज़न में बदलाव कैंसर नहीं होता। लेकिन कोई बदलाव कई सप्ताह तक बना रहे, बढ़े या बार-बार लौटे, तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैंसर के शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं, किन बदलावों के लिए जाँच ज़रूरी है और कैंसर की शुरुआती पहचान कैसे की जाती है।

कैंसर कैसे शुरू होता है?

कैंसर में शरीर केकुछ सेल्स बिना क़ाबू के बढ़ने लगते हैं। वे गाँठ बना सकते हैं या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुँच सकते हैं। हालाँकि, हर गाँठ कैंसर वाली नहीं होती।

कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है। इसके कई प्रकार होते हैं, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में शुरू हो सकते हैं। इसलिए कैंसर के शुरुआत के लक्षण उसके प्रकार और प्रभावित अंग के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ कैंसर शुरुआत में कोई साफ़ लक्षण नहीं देते।

कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि बीमारी शरीर के किस हिस्से में शुरू हुई है। फिर भी कुछ बदलाव कई प्रकार के कैंसर में दिखाई दे सकते हैं।

इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब ये नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर है। ये बदलाव दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। लेकिन कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे, बढ़ रहा हो या बार-बार हो रहा हो, तो जाँच कराना ज़रूरी है।

ध्यान देने योग्य कुछ सामान्य कैंसर के सामान्य लक्षण में शामिल हैं:

  • बिना कारण वज़न कम होना: खानपान या गतिविधि बदले बिना वज़न घट रहा हो, तो जाँच कराएँ। ये थायरॉइड, डायबिटीज़, पाचन की समस्या या कैंसर से जुड़ा हो सकता है।
  • गाँठ या असामान्य सूजन: स्तन, गर्दन, बगल, पेट या किसी दूसरे हिस्से में नई गाँठ की जाँच कराएँ। दर्द ना होने पर भी बढ़ती या लंबे समय तक बनी गाँठ को दिखाना ज़रूरी है।
  • लगातार थकान या कमज़ोरी: आराम के बाद भी थकान रहना ख़ून की कमी, इन्फ़ेक्शन, हार्मोन की समस्या या कुछ कैंसर से जुड़ा हो सकता है।
  • लंबे समय तक खाँसी या आवाज़ में बदलाव: खाँसी कई सप्ताह तक ठीक ना हो, बढ़े, ख़ून आए या आवाज़ लगातार भारी रहे, तो डॉक्टर से मिलें।
  • बिना कारण ख़ून आना: मल, पेशाब, खाँसी या उल्टी में ख़ून आने की जाँच कराएँ। पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग को भी नज़रअंदाज़ ना करें।
  • मल या पेशाब की आदत में बदलाव: लगातार कब्ज़, दस्त, मल का आकार बदलना या पेशाब में परेशानी के कई कारण हो सकते हैं। समस्या बनी रहे तो जाँच कराएँ।
  • घाव या मुँह का छाला ठीक ना होना: घाव या छाला 2 से 3 सप्ताह में ठीक ना हो, ख़ून आए या बढ़े, तो दिखाएँ। मुँह के लाल या सफ़ेद पैच की भी जाँच कराएँ।
  • तिल या त्वचा में बदलाव: नया तिल या पुराने तिल के आकार, रंग, किनारों या बनावट में बदलाव कैंसर के चेतावनी संकेत हो सकता है। इसे त्वचा विशेषज्ञ को दिखाएँ।
  • खाने या निगलने में परेशानी: लगातार अपच, निगलने में दिक्कत, भूख कम लगना या थोड़ा खाने पर पेट भरना जाँच की माँग कर सकता है।
  • लगातार दर्द, बुख़ार या रात में पसीना: ये कई समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। दूसरे लक्षण भी हों या परेशानी बनी रहे, तो सलाह लें।

लक्षण सामान्य समस्या हैं या जाँच की ज़रूरत है?

इन्फ़ेक्शन, चोट, दवाओं के असर या जीवनशैली के कारण भी शरीर में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए ये देखना ज़रूरी है कि लक्षण कितने समय से हैं और क्या वे लगातार बढ़ रहे हैं।

कोई नया बदलाव 2 से 3 सप्ताह तक ठीक ना हो या बढ़े, तो डॉक्टर से मिलें। दर्द का इंतज़ार ना करें, क्योंकि कुछ कैंसर शुरुआत में दर्द नहीं करते। तेज़ साँस की परेशानी, अधिक ब्लीडिंग या खाँसी में ज़्यादा ख़ून आए तो तुरंत इमरजेंसी सहायता लें।

किन लोगों में कैंसर का ख़तरा अधिक हो सकता है?

कैंसर किसी को भी हो सकता है।

फिर भी कुछ स्थितियाँ इसका ख़तरा बढ़ा सकती हैं:

  • तम्बाकू का सेवन करना या दूसरों की सिगरेट का धुआँ साँस के साथ अंदर लेना
  • अधिक शराब पीना
  • परिवार में कुछ प्रकार के कैंसर का हिस्ट्री होना
  • उम्र बढ़ना
  • मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
  • शरीर पर तेज़ धूप, रेडिएशन या हानिकारक केमिकल्स का लंबे समय तक असर पड़ना
  • एचपीवी, हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी जैसे कुछ इन्फ़ेक्शन

अधिक ख़तरे का अर्थ कैंसर होना नहीं है। मेडिकल और पारिवारिक हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर सही जाँच बता सकते हैं।

कैंसर की जाँच और स्क्रीनिंग कैसे होती है?

डॉक्टर लक्षणों की अवधि और मेडिकल हिस्ट्री पूछकर शारीरिक जाँच कर सकते हैं।

आगे के टेस्ट संभावित कारण पर निर्भर करते हैं:

  • ख़ून और पेशाब के टेस्ट: ये ख़ून की कमी, अंगों को खतरा या दूसरे बदलाव बताते हैं। केवल इनसे हर कैंसर की पुष्टि नहीं होती।
  • इमेजिंग टेस्ट: अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, मैमोग्राफी, सीटी स्कैन या एम.आर.आई. से शरीर के अंदर बदलाव देखे जाते हैं।
  • एंडोस्कोपी: कैमरे वाली पतली ट्यूब से शरीर के कुछ अंदरूनी हिस्से देखे जाते हैं।
  • बायोप्सी: संदिग्ध हिस्से का छोटा सैंपल लैब में जाँचा जाता है। कई मामलों में इससे कैंसर की पुष्टि होती है।

कैंसर की स्क्रीनिंग लक्षण शुरू होने से पहले कुछ कैंसर या उनसे पहले होने वाले बदलाव खोजती है। उम्र और ख़तरे के अनुसार इसमें एच.पी.वी. या पैप टेस्ट, मैमोग्राफी, स्टूल टेस्ट या कोलोनोस्कोपी शामिल हो सकती है। अधिक धूम्रपान की हिस्ट्री होने पर लो-डोज़ सीटी स्कैन की सलाह दी जा सकती है। हर टेस्ट सभी के लिए सही नहीं होता, इसलिए डॉक्टर से पूछें।

कैंसर विशेषज्ञ से कब मिलें?

पहले सामान्य डॉक्टर या प्रभावित अंग के विशेषज्ञ से मिल सकते हैं। सर की आशंका होने पर डॉक्टर आगे की जाँच के लिए आपको कैंसर विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ रिपोर्ट देखकर आगे की जाँच और इलाज बताते हैं।

नई गाँठ, असामान्य ब्लीडिंग, घटते वज़न या लगातार खाँसी के लिए कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श लेने में देरी ना करें। विशेषज्ञ से परामर्श लेते समय पुरानी रिपोर्ट साथ रखें। ऐसा कैंसर विशेषज्ञ अस्पताल चुनें जहाँ ज़रूरी जाँच और इलाज की सुविधाएँ उपलब्ध हों।

कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

हर कैंसर को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें ख़तरा कम करने में मदद कर सकती हैं:

  • किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन ना करें और उसके धुएँ से बचें।
  • शराब से बचें और उसका सेवन सीमित करें।
  • संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और स्वस्थ वज़न पर ध्यान दें।
  • तेज़ धूप में त्वचा को कपड़ों, छाया और सनस्क्रीन से बचाएँ।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार एच.पी.वी. और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगवाएँ।
  • उम्र और व्यक्तिगत ख़तरे के अनुसार स्क्रीनिंग कराएँ।

सप्लीमेंट, डिटॉक्स ड्रिंक या खास भोजन से कैंसर रोकने या ठीक करने के दावे पर भरोसा ना करें।

निष्कर्ष

कैंसर के शुरुआती लक्षण सामान्य परेशानी जैसे लग सकते हैं। हर लक्षण कैंसर नहीं होता, लेकिन बदलाव कई सप्ताह तक रहे या बढ़े, तो समय पर जाँच कराएँ।

सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद का एक प्रमुख कैंसर उपचार अस्पताल है। यहाँ अनुभवी कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से अलग-अलग प्रकार के कैंसर की जाँच और इलाज करते हैं। यदि कोई लक्षण लंबे समय से बना हुआ है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेकर ज़रूरी जाँच कराएँ।

सही जाँच और इलाज के लिए आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।

FAQs

बिना कारण वज़न घटना, नई गाँठ, लगातार थकान, असामान्य ब्लीडिंग और लंबे समय तक खाँसी रहना कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हालाँकि, ये लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं।

बढ़ती गाँठ, ठीक ना होने वाला घाव, बिना किसी स्पष्ट कारण ख़ून आना, निगलने में परेशानी या तिल में बदलाव होने पर जाँच कराएँ।

हाँ। कुछ कैंसर शुरुआत में दर्द नहीं करते, इसलिए जाँच के लिए दर्द होने का इंतज़ार ना करें।

हाँ, लेकिन थायरॉइड, डायबिटीज़ और पाचन की समस्याएँ भी वज़न घटने का कारण हो सकती हैं।

आराम के बाद भी थकान कम ना हो या उसके साथ वज़न घटे और बुख़ार रहे, तो जाँच कराएँ।

खाँसी या आवाज़ का बदलाव कई सप्ताह तक रहे अथवा साथ में ख़ून और साँस की परेशानी हो, तो डॉक्टर से मिलें।

जाँच में ख़ून के टेस्ट, इमेजिंग, एंडोस्कोपी या बायोप्सी हो सकती है। स्क्रीनिंग का प्रकार उम्र और ख़तरे पर निर्भर करता है।

पहले सामान्य डॉक्टर या संबंधित अंग के विशेषज्ञ से मिलें। ज़रूरत पर वे सही ऑन्कोलॉजिस्ट के पास भेजेंगे।

जल्दी पहचान से इलाज समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है और उसके सफल होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

Dr. Ashish B. Agrawal | Medical Oncology,Cancer Care | Sarvodaya Hospital

Dr. Ashish B. Agrawal
Associate Director & Head (Unit II) - Medical Oncology, Haematology & BMT

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