बच्चे के पेट में दर्द हो, तो अक्सर गैस या कब्ज़ का ख़याल आता है। लेकिन बढ़ते दर्द के कारण बच्चा खाना या खेलना छोड़ दे, तो इसे हल्के में ना लें। इसकी वजह अपेंडिसाइटिस भी हो सकती है, जिसमें जल्दी इलाज ज़रूरी है।
शुरुआत में इसके लक्षण पेट के इन्फ़ेक्शन जैसे लग सकते हैं। छोटे बच्चे दर्द की जगह भी ठीक से नहीं बता पाते। इसलिए बुखार या उल्टी का इंतज़ार किए बिना दर्द और बच्चे के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बच्चों में अपेंडिसाइटिस के लक्षण कैसे पहचानें, सामान्य पेट दर्द से इनका क्या फ़र्क़ हो सकता है और कब तुरंत अस्पताल जाएँ। जाँच और इलाज के तरीक़े भी समझेंगे।
अपेंडिसाइटिस क्या होता है
अपेंडिक्स बड़ी आँत से जुड़ा एक छोटा अंग है, जो पतली नली जैसा दिखता है। ये आमतौर पर पेट में दाहिनी ओर, नीचे की तरफ़ होता है। अपेंडिसाइटिस होने पर बच्चों में अपेंडिक्स सूज जाता है। कभी सूजन के साथ उसमें इन्फ़ेक्शन भी हो जाता है।
इलाज में देरी होने पर अपेंडिक्स फट सकता है और इन्फ़ेक्शन पेट में फैल सकता है। इसका शक होने पर जल्दी मदद लें।
बच्चों में अपेंडिसाइटिस के लक्षण
दर्द अक्सर नाभि के आसपास शुरू होता है। कुछ घंटों में ये पेट के दाहिने निचले हिस्से में बढ़ सकता है। हालाँकि, हर बच्चे में ऐसा नहीं होता।
दर्द के साथ इन बदलावों पर भी ध्यान दें:
- दर्द बढ़ना: चलते या खाँसते समय बच्चे का पेट ज़्यादा दुख सकता है। ऐसे में बच्चा उठने या चलने के बजाय लेटा रहना चाह सकता है।
- भूख कम होना: बच्चा पसंदीदा खाना भी खाने से मना कर सकता है।
- जी मिचलाना या उल्टी: अक्सर दर्द शुरू होने के बाद ये परेशानी होती है, लेकिन क्रम हमेशा एक जैसा नहीं होता।
- बुखार: हल्का बुखार हो सकता है। शुरुआत में बुखार ना होने पर भी अपेंडिसाइटिस संभव है।
- पेट फूलना या शौच में बदलाव: कभी कब्ज़ या दस्त भी हो सकते हैं।
छोटे बच्चों में अपेंडिक्स के शुरुआती लक्षण पहचानना मुश्किल हो सकता है। वे चिड़चिड़े हो सकते हैं या पूरे पेट में दर्द बता सकते हैं। केवल इन लक्षणों से बीमारी की पुष्टि नहीं होती।
सामान्य पेट दर्द और अपेंडिसाइटिस के दर्द में फ़र्क़
बच्चों में पेट दर्द कब्ज़, पेट के इन्फ़ेक्शन या पेशाब के इन्फ़ेक्शन से भी हो सकता है। हर पेट दर्द अपेंडिसाइटिस नहीं होता।
अपेंडिसाइटिस का दर्द अक्सर समय के साथ बढ़ता है और चलना-फिरना मुश्किल कर सकता है। बच्चे के दाहिने पेट में दर्द लगातार बना रहे, ख़ासकर निचले हिस्से में, तो जल्दी जाँच कराएँ। घर पर पेट दबाकर या बच्चे को कुदाकर बीमारी समझने की कोशिश ना करें।
अपेंडिसाइटिस होने के कारण
कभी अपेंडिक्स के अंदर का रास्ता सख़्त मल से बंद हो जाता है। इन्फ़ेक्शन के बाद अंदर की सूजन भी रुकावट पैदा कर सकती है। इससे बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं।
कई मामलों में कारण साफ़ नहीं होता। ये माता-पिता की देखभाल में कमी का संकेत नहीं है।
तुरंत अस्पताल जाने के संकेत
दर्द बढ़ता जा रहा हो या दाहिने निचले पेट में पहुँच जाए, तो बिना देरी जाँच कराएँ।
इन स्थितियों में नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ:
- बच्चे के पेट में तेज दर्द हो या दर्द पूरे पेट में फैल रहा हो।
- बच्चा दर्द के कारण चल ना पा रहा हो या पेट बहुत फूल रहा हो।
- उल्टी बार-बार आए।
- बच्चा बहुत सुस्त हो, उसे जगाना मुश्किल हो या साँस लेने में परेशानी हो।
अपेंडिक्स फटने पर दर्द कुछ देर के लिए कम हो सकता है। फिर पूरे बच्चे के पेट में तेज़ दर्द होने लग सकता है। इसलिए अचानक दर्द कम होने का मतलब ये नहीं कि बच्चा ठीक हो रहा है। अपेंडिक्स फटने से इन्फ़ेक्शन पेट में फैल सकता है और बच्चे की हालत बिगड़ सकती है।
अपेंडिसाइटिस की पहचान और ज़रूरी जाँच
डॉक्टर पूछते हैं कि दर्द कब शुरू हुआ, कहाँ है और कैसे बदल रहा है। भूख, उल्टी, बुखार और शौच की जानकारी भी दें।
पेट की जाँच के बाद ज़रूरत के अनुसार ये टेस्ट चुने जा सकते हैं:
- ख़ून की जाँच: सूजन और इन्फ़ेक्शन के संकेत देखने के लिए। इससे अकेले बीमारी की पुष्टि नहीं होती।
- पेशाब की जाँच: पेशाब के इन्फ़ेक्शन जैसे दूसरे कारण समझने के लिए।
- अल्ट्रासाउंड: अपेंडिक्स में सूजन या आसपास के बदलाव देखने के लिए। बच्चों में ये अक्सर पहला स्कैन होता है और इसमें रेडिएशन नहीं होता।
- एम.आर.आई. या सी.टी. स्कैन: अल्ट्रासाउंड के बाद भी दर्द की वजह समझ ना आए, तो डॉक्टर इनमें से किसी स्कैन की सलाह दे सकते हैं। सी.टी. स्कैन में एक्स-रे का इस्तेमाल होता है। इसलिए बच्चे को ये जाँच करानी है या नहीं, इसका फ़ैसला फ़ायदे और जोखिम देखकर किया जाता है।
हर बच्चे को सभी टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं होती। कभी बच्चे को कुछ समय अस्पताल में रखकर देखा जाता है कि दर्द और दूसरे लक्षण कैसे बदल रहे हैं। इस दौरान दोबारा पेट की जाँच भी की जा सकती है।
बच्चों में अपेंडिसाइटिस का इलाज
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि अपेंडिक्स केवल सूजा है या फट चुका है। सामान्य इलाज में एंटीबायोटिक और अपेंडिक्स की सर्जरी शामिल होती हैं। सर्जरी में बेहोशी की दवा देकर प्रभावित अपेंडिक्स हटाया जाता है।
बच्चे की स्थिति के अनुसार इन तरीक़ों से मदद दी जा सकती है:
- लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: पेट पर कुछ छोटे कट लगाए जाते हैं। एक छोटे कैमरे की मदद से अंदर देखकर अपेंडिक्स हटाया जाता है।
- ओपन सर्जरी: पेट पर एक बड़ा कट लगाकर अपेंडिक्स हटाया जाता है।
- रोबोटिक सर्जरी: इसमें सर्जन रोबोट को नियंत्रित करके पेट पर छोटे कट लगाते हैं और अपेंडिक्स हटाते हैं। बच्चे की सर्जरी इस तरीक़े से हो सकती है या नहीं, इस बारे में बाल सर्जन से सलाह लें।
- ड्रिप और दवाएँ: उल्टी या पानी की कमी होने पर ड्रिप लगाई जा सकती है। एंटीबायोटिक इन्फ़ेक्शन के इलाज में मदद करती हैं। दर्द कम करने की दवा भी दी जाती है।
कुछ चुने हुए मामलों में, जहाँ अपेंडिक्स फटा नहीं है, केवल एंटीबायोटिक पर विचार हो सकता है। इसके लिए विशेषज्ञ की निगरानी ज़रूरी है। इलाज से सुधार ना हो या बीमारी लौट आए, तो सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
पेट में पस जमा हो जाए, तो उसे निकालने और एंटीबायोटिक देने की ज़रूरत पड़ सकती है। बच्चे की हालत देखकर सर्जन तय करते हैं कि ऑपरेशन कब करना है।
माता-पिता के लिए देखभाल की सलाह
बढ़ते दर्द में घरेलू उपायों के कारण जाँच ना टालें। दी गई दवाओं की जानकारी साथ रखें। अपने आप एंटीबायोटिक या कब्ज़ की दवा ना दें।
इलाज के बाद इन बातों का ध्यान रखें:
- दवाएँ और घाव की देखभाल बताई गई सलाह के अनुसार करें।
- बच्चा स्कूल कब जा सकता है और खेलना-कूदना कब शुरू कर सकता है, ये सर्जन से पूछें।
- बुखार आए, दर्द बढ़े, बार-बार उल्टी हो या ऑपरेशन वाली जगह से पस निकले, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आप मथुरा में बच्चों के सर्जन तलाश रहे हों, तो बच्चों की सर्जरी का अनुभव और इमरजेंसी सुविधा देखें। गंभीर दर्द में अपॉइंटमेंट का इंतज़ार ना करें।
निष्कर्ष
बच्चों में अपेंडिसाइटिस के लक्षण शुरुआत में सामान्य पेट दर्द जैसे लग सकते हैं। बढ़ते दर्द, भूख कम होने और बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर जल्दी जाँच कराएँ। समय पर इलाज से गंभीर परेशानियों का ख़तरा कम हो सकता है।
भारत में सर्वोत्तम बाल शल्य चिकित्सा अस्पताल की तलाश कर रहे परिवार सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद के बाल सर्जन से सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर बच्चे के लक्षण और हालत समझकर ज़रूरी जाँच और इलाज की योजना बनाते हैं। वे माता-पिता को इलाज के विकल्प और ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी समझाते हैं। अस्पताल में रोबोटिक अपेंडिक्स सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध है। इसमें पेट पर छोटे कट लगाए जाते हैं। कैमरा पेट के अंदर की बड़ी और साफ़ तस्वीर दिखाता है, जिसे देखकर सर्जन रोबोट की मदद से अपेंडिक्स हटाते हैं। बच्चे की सर्जरी इस तरीक़े से हो सकती है या नहीं, इस बारे में बाल सर्जन से सलाह लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. बच्चों में अपेंडिसाइटिस क्या होता है?
अपेंडिक्स में सूजन होने को अपेंडिसाइटिस कहते हैं। इसमें जल्दी इलाज ज़रूरी है।
2. बच्चों में अपेंडिसाइटिस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
नाभि के आसपास दर्द, भूख कम होना और जी मिचलाना शुरुआती संकेत हो सकते हैं। छोटे बच्चों में लक्षण अलग भी हो सकते हैं।
3. अपेंडिसाइटिस का दर्द पेट में कहाँ से शुरू होता है?
दर्द अक्सर नाभि के आसपास शुरू होकर दाहिने निचले पेट में बढ़ता है। हर बच्चे में दर्द इसी तरह नहीं होता।
4. बच्चे के दाहिने निचले पेट में दर्द होना कब चिंता की बात है?
दर्द बढ़े या चलने पर तकलीफ़ हो, तो जल्दी जाँच ज़रूरी है। तेज़ दर्द में इमरजेंसी जाएँ।
5. क्या अपेंडिसाइटिस में बुखार और उल्टी भी हो सकती है?
हाँ, दोनों हो सकते हैं। लेकिन इनके बिना भी अपेंडिसाइटिस हो सकता है।
6. सामान्य पेट दर्द और अपेंडिसाइटिस के दर्द में क्या अंतर हो सकता है?
अपेंडिसाइटिस में दर्द अक्सर बढ़ता है और चलने-फिरने पर तकलीफ़ होती है। केवल दर्द से कारण तय नहीं होता।
7. बच्चों में अपेंडिसाइटिस की जाँच कैसे की जाती है?
लक्षणों और पेट की जाँच के बाद ज़रूरत के अनुसार ख़ून, पेशाब और अल्ट्रासाउंड की जाँच होती है। ज़रूरत होने पर दूसरे स्कैन भी किए जाते हैं।
8. क्या बच्चों में अपेंडिसाइटिस बिना सर्जरी के ठीक हो सकता है?
कुछ चुने हुए मामलों में एंटीबायोटिक से सुधार हो सकता है। लेकिन बीमारी लौटने पर सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
9. अपेंडिक्स फटने पर क्या हो सकता है?
अपेंडिक्स फटने से इन्फ़ेक्शन पेट में फैल सकता है या पस जमा हो सकती है। ऐसा होने पर बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएँ।
10. बच्चे को पेट दर्द होने पर पीडियाट्रिक सर्जन को कब दिखाना चाहिए?
बढ़ते दर्द या दाहिने निचले पेट में लगातार दर्द होने पर जल्दी नोएडा में पीडियाट्रिक सर्जन से जाँच कराएँ। बहुत तेज़ दर्द या गंभीर सुस्ती में सीधे इमरजेंसी जाएँ।