शुगर कंट्रोल में रखना डायबिटीज की देखभाल का अहम हिस्सा है। इससे डायबिटीज की जटिलताएँ होने का ख़तरा कम होता है। फिर भी कुछ मरीज़ों में आँखों, किडनी, नसों या हृदय से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
अक्सर सामान्य शुगर रिपोर्ट देखकर लगता है कि अब दूसरे अंगों की जाँच ज़रूरी नहीं है। लेकिन पहले बढ़ी रही शुगर का असर या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएँ भी अंगों को प्रभावित कर सकती हैं।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि शुगर कंट्रोल के बावजूद जटिलताएँ क्यों हो सकती हैं, किन जाँचों की ज़रूरत पड़ती है और रोज़मर्रा की सावधानियाँ कैसे मदद कर सकती हैं।
शुगर कंट्रोल का सही मतलब
खाली पेट की एक सामान्य रीडिंग पूरे दिन की शुगर नहीं बताती। खाने के बाद शुगर बढ़ सकती है। एचबीएवनसी नाम का ख़ून का टेस्ट पिछले लगभग तीन महीनों की औसत शुगर बताता है, लेकिन हर उतार-चढ़ाव नहीं दिखाता।
शुगर का लक्ष्य उम्र, दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय होता है। इसलिए रिपोर्ट समझने के लिए डायबिटीज डॉक्टर से परामर्श लें।
शुगर कंट्रोल होने के बावजूद डायबिटीज की जटिलताएँ होने के कारण
डायबिटीज की लंबी अवधि की जटिलताएँ धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं। इसलिए आज शुगर सामान्य होने पर भी पहले बढ़ी रही शुगर का असर बना रह सकता है।
इसके कुछ कारण हैं:
- पहले बढ़ी रही शुगर: अगर शुगर लंबे समय तक बढ़ी रही हो, तो ख़ून की नलियों और नसों को नुक़सान पहुँच सकता है। शुगर कंट्रोल में आने के बाद भी यह नुक़सान पूरी तरह ठीक हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है।
- दिन में शुगर का बढ़ना: सुबह खाली पेट शुगर सामान्य हो सकती है, लेकिन खाने के बाद बढ़ सकती है। केवल सुबह जाँच करने से इस बढ़ोतरी का पता नहीं चलता।
- बढ़ा ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल: अधिक ब्लड प्रेशर ख़ून की नलियों को नुक़सान पहुँचा सकता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से नलियों में वसा जम सकती है, जिससे ख़ून के बहाव में रुकावट आ सकती है।
- दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ: लंबे समय से डायबिटीज या पहले से किडनी और हृदय की बीमारी होने पर जटिलताओं का ख़तरा अधिक हो सकता है। तंबाकू का सेवन भी यह ख़तरा बढ़ाता है।
डायबिटीज से शरीर के किन अंगों पर असर पड़ सकता है
डायबिटीज के दुष्प्रभाव शुरुआत में महसूस नहीं होते। डायबिटीज से होने वाली बीमारियाँ आँखों, किडनी, नसों और हृदय को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रमुख अंगों पर इसका असर इस तरह पड़ सकता है:
- आँखें: आँख के पीछे रेटिना नाम की एक परत होती है, जो देखने में मदद करती है। डायबिटीज इसकी छोटी ख़ून की नलियों को नुक़सान पहुँचा सकती है। शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता, लेकिन समय के साथ नज़र धुँधली या कमज़ोर हो सकती है।
- किडनी: किडनी के छोटे फ़िल्टर ख़ून से बेकार पदार्थ और अतिरिक्त पानी निकालते हैं। इन फ़िल्टरों को नुक़सान होने पर पेशाब में प्रोटीन आ सकता है। धीरे-धीरे किडनी की ख़ून साफ़ करने की क्षमता भी घट सकती है।
- नसें और पैर: नसों को नुक़सान होने से पैरों में जलन, झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है। पैर सुन्न होने पर कट या चोट का पता नहीं चलता। पैरों तक पर्याप्त ख़ून ना पहुँचने से घाव भरने में भी देर लग सकती है।
- हृदय और दिमाग़: डायबिटीज में ख़ून की नलियों के अंदर फ़ैट जमने का ख़तरा बढ़ सकता है। इससे हृदय या दिमाग़ तक ख़ून पहुँचने में रुकावट आ सकती है। हृदय में ऐसी रुकावट से हार्ट अटैक और दिमाग़ में रुकावट से स्ट्रोक हो सकता है।
डायबिटीज की नियमित जाँच में क्या शामिल है
डायबिटीज से अंगों को होने वाले नुक़सान का शुरुआत में पता नहीं चल पाता। वहीं, धुँधली नज़र या झुनझुनी के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए समस्या पहचानने के लिए जाँच ज़रूरी है।
डॉक्टर ज़रूरत के अनुसार इन जाँचों की सलाह दे सकते हैं:
- शुगर और एचबीएवनसी: ब्लड शुगर टेस्ट जाँच के समय की शुगर बताता है। एचबीएवनसी से पिछले लगभग तीन महीनों की औसत शुगर पता चलती है। इनसे डॉक्टर समझते हैं कि इलाज कितना असर कर रहा है।
- किडनी के टेस्ट: ख़ून में क्रिएटिनिन नाम के बेकार पदार्थ की मात्रा जाँची जाती है। इससे पता लगाने में मदद मिलती है कि किडनी ख़ून कितनी अच्छी तरह साफ़ कर रही है। पेशाब में एल्ब्यूमिन नाम के प्रोटीन की जाँच किडनी को हुए शुरुआती नुक़सान का संकेत दे सकती है।
- आँखों की जाँच: डॉक्टर आँखों में ड्रॉप डालकर पुतलियाँ फैलाते हैं। इससे आँख के पीछे की परत, रेटिना, और उसकी छोटी ख़ून की नलियों को देखकर नुक़सान का पता लगाया जा सकता है।
- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल: इनका स्तर बढ़ने से हृदय और ख़ून की नलियों को नुक़सान पहुँच सकता है। बढ़ा ब्लड प्रेशर किडनी को भी प्रभावित कर सकता है। जाँच से डॉक्टर तय करते हैं कि इन्हें कंट्रोल करने के लिए इलाज चाहिए या नहीं।
- पैरों की जाँच: डॉक्टर पैरों में कट, छाले या घाव देखते हैं। वे यह भी जाँचते हैं कि छूने पर ठीक से महसूस होता है या नहीं और पैरों तक ख़ून सही तरह पहुँच रहा है या नहीं।
जटिलताओं का ख़तरा कम करने के लिए ज़रूरी सावधानियाँ
शुगर कंट्रोल के साथ कुछ रोज़मर्रा की आदतें भी अंगों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं:
- दवाएँ नियमित लें: रिपोर्ट सामान्य आने पर अपने आप दवा बंद या उसकी मात्रा कम ना करें। इलाज में बदलाव डॉक्टर की सलाह से ही करें।
- खानपान का ध्यान रखें: सब्ज़ियाँ, दालें और साबुत अनाज खाएँ। कितना और कब खाना है, यह अपनी दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटीशियन से समझें।
- नियमित चलें या व्यायाम करें: अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहें। पैरों में घाव या हृदय की परेशानी हो तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।
- पैर रोज़ जाँचें: तलवों और उँगलियों के बीच कट, छाले या लालिमा देखें। आरामदायक जूते पहनें और नंगे पैर ना चलें।
- तंबाकू से बचें: सिगरेट, बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू का सेवन छोड़ें। ज़रूरत हो तो डॉक्टर से मदद लें।
- नियमित जाँच कराएँ: शुगर के साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी ध्यान दें। डॉक्टर की बताई जाँचें समय पर कराएँ।
डॉक्टर से कब संपर्क करें
लगातार धुँधली नज़र, पैरों में सुन्नपन, सूजन या नया घाव होने पर डायबिटीज विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। घाव में पस, फैलती लालिमा या बुख़ार हो तो उसी दिन जाँच कराएँ।
सीने में दर्द, अचानक साँस फूलना, नज़र घटना, बोलने में परेशानी या शरीर के एक तरफ कमज़ोरी होने पर तुरंत नज़दीकी इमरजेंसी में जाएँ।
निष्कर्ष
शुगर कंट्रोल में रखना फ़ायदेमंद है, लेकिन डायबिटीज की जटिलताएँ रोकने के लिए पूरी सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी है। नियमित जाँच और समय पर देखभाल से जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।
सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद में डायबिटीज और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं की जाँच व इलाज किया जाता है। अगर आप डायबिटीज उपचार अस्पताल की तलाश में हैं, तो यहाँ मधुमेह रोग विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी ज़रूरत के अनुसार इलाज और नियमित जाँच की सलाह दे सकते हैं।
सही जाँच और इलाज के लिए आज ही सर्वोदय हॉस्पिटल में विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें।