तेज़ चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर कुछ देर साँस तेज़ हो सकती है। लेकिन आराम करते समय साँस लेने में ज़ोर लगाना, अचानक हाँफना या बोलने में परेशानी होना गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसी साँस लेने में तकलीफ़ में तुरंत मदद की ज़रूरत पड़ सकती है।
कई लोग इसे थकान या घबराहट समझकर टाल देते हैं। लेकिन तकलीफ़ अचानक शुरू हुई हो या पहले से बढ़ गई हो, तो उसकी वजह समझना ज़रूरी है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि साँस की तकलीफ़ कब इमरजेंसी बन सकती है, किन संकेतों पर तुरंत मदद लें और अस्पताल में जाँच व इलाज कैसे किया जाता है।
साँस लेने में तकलीफ़ को कैसे पहचानें
ऐसा महसूस हो सकता है कि पूरी साँस नहीं आ रही या हवा कम पड़ रही है। साँस फूलना कई समस्याओं में हो सकता है। केवल इससे किसी बीमारी की पुष्टि नहीं होती।
पहले आसानी से होने वाले काम में अब साँस फूलने लगे, लेटने पर परेशानी बढ़े या रात में साँस की वजह से नींद खुले, तो जाँच कराएँ।
तुरंत मदद लेने के संकेत
मरीज़ कितना हाँफ रहा है और बोल पा रहा है या नहीं, इससे परेशानी की गंभीरता समझने में मदद मिलती है।
इन संकेतों में तुरंत इमरजेंसी सहायता लें:
- बहुत हाँफना: साँस इतनी मुश्किल से आना कि पूरा वाक्य बोलना या कुछ शब्द कहना भी कठिन हो।
- सीने में दर्द या दबाव: सीने में दर्द और साँस फूलना, ख़ासकर पसीने, चक्कर या बाँह और जबड़े में दर्द के साथ।
- होंठों का रंग बदलना: होंठों या जीभ का रंग नीला पड़ना।
- होश या व्यवहार में बदलाव: बेहोशी, असामान्य सुस्ती या अचानक बात समझने में परेशानी।
- गले या जीभ में सूजन: खाने, दवा या कीड़े के डंक के बाद सूजन के साथ साँस बिगड़ना।
- तेज़ी से बिगड़ती हालत: अचानक साँस फूलना और परेशानी बढ़ते जाना, या आराम करते हुए भी गंभीर तकलीफ़ होना।
ख़ाँसी में ख़ून आए या साँस की तकलीफ़ के साथ एक पैर में नई सूजन हो, तो भी बिना देरी चिकित्सा सहायता लें।
ऑक्सीजन कम होने के लक्षण
ऑक्सीजन कम होने पर साँस तेज़ चलना, बेचैनी, नीले होंठ या असामान्य सुस्ती हो सकती है। लेकिन हर व्यक्ति में सभी संकेत नहीं दिखते।
पल्स ऑक्सीमीटर ख़ून में ऑक्सीजन का अनुमान देता है। ठंडी उँगलियों, हिलने, नेल पॉलिश और त्वचा के रंग से रीडिंग प्रभावित हो सकती है। सामान्य रीडिंग देखकर गंभीर लक्षणों को ना टालें। रीडिंग बार-बार कम आए, तो चिकित्सा सलाह लें।
साँस की इमरजेंसी में शुरुआती मदद
गंभीर लक्षणों में तुरंत मदद लें।
इस दौरान ये क़दम अपनाएँ:
- एम्बुलेंस बुलाएँ: नज़दीकी इमरजेंसी सेवा से संपर्क करें। मरीज़ को ख़ुद गाड़ी चलाने ना दें।
- आराम से बैठाएँ: होश में मौजूद मरीज़ को ऐसी स्थिति में बैठने दें जिसमें साँस लेना आसान लगे। तंग कपड़े ढीले करें।
- पहले से लिखी दवा दें: अस्थमा का राहत वाला इनहेलर हो, तो डॉक्टर की बताई योजना के अनुसार इस्तेमाल करने में मदद करें।
- साथ रहें: साँस और होश में बदलाव देखते रहें। गंभीर परेशानी में कुछ खाने-पीने को ना दें।
- साँस बंद होने पर मदद करें: मरीज़ बेहोश हो और सामान्य साँस ना ले रहा हो, तो इमरजेंसी ऑपरेटर के निर्देशों के अनुसार सी.पी.आर. शुरू करें।
साँस फूलने के कारण
फेफड़ों के अलावा दिल और दूसरी समस्याओं से भी साँस बिगड़ सकती है।
इसके संभावित कारण हैं:
- अस्थमा: साँस की नलियों में सूजन आने और उनके सिकुड़ने से साँस लेना मुश्किल हो सकता है। साँस लेते समय सीटी जैसी आवाज़ आ सकती है या खाँसी हो सकती है।
- फेफड़ों का इन्फ़ेक्शन: निमोनिया जैसे इन्फ़ेक्शन में खाँसी और बुख़ार के साथ साँस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती है।
- दिल की समस्या: दिल की पंप करने की क्षमता कम होने पर फेफड़ों में पानी जमा हो सकता है। हार्ट अटैक में भी साँस फूल सकती है।
- ख़ून का थक्का: फेफड़ों की ख़ून नली में थक्का फँसने से अचानक तकलीफ़ और सीने में दर्द हो सकता है।
- गंभीर एलर्जी: गले में सूजन से साँस का रास्ता प्रभावित हो सकता है।
- दूसरे कारण: ख़ून की कमी, फेफड़ों की पुरानी बीमारी या पैनिक अटैक से भी तकलीफ़ हो सकती है।
नई या गंभीर साँस लेने में परेशानी को बिना जाँच केवल घबराहट ना मानें।
कारण समझने के लिए जाँच
अस्पताल में साँस, ऑक्सीजन, धड़कन और ब्लड प्रेशर देखा जाता है। गंभीर हालत में इलाज जाँच के साथ शुरू हो सकता है। पुरानी बीमारियों और दवाओं की जानकारी भी दें।
कारण के अनुसार इनमें से कुछ जाँचें की जा सकती हैं:
- पल्स ऑक्सीमीटर: ख़ून में ऑक्सीजन का अनुमान लगाता है।
- ई.सी.जी.: दिल की धड़कन और हार्ट अटैक जैसे कुछ संभावित कारणों के संकेत देखने में मदद करता है।
- चेस्ट एक्स-रे: फेफड़ों में इन्फ़ेक्शन या पानी जमा होने के संकेत देखने में मदद करता है।
- ब्लड टेस्ट: ख़ून की कमी, इन्फ़ेक्शन या दिल से जुड़े कुछ संकेत जाँचने के लिए।
- ब्लड गैस टेस्ट: ख़ून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड मापता है। गंभीर परेशानी में इसकी ज़रूरत पड़ सकती है।
ज़रूरत होने पर सी.टी. स्कैन भी किया जा सकता है। सभी मरीज़ों को हर टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं होती।
साँस लेने में दिक्कत का इलाज
इलाज में साँस सँभालने के साथ उसके कारण का उपचार किया जाता है। इसके लिए स्थिति के अनुसार अलग मदद दी जाती है।
इलाज में ये शामिल हो सकते हैं:
- इनहेलर या नेब्युलाइज़र से दवा: अस्थमा में साँस की नलियाँ खोलने के लिए।
- ऑक्सीजन: ख़ून में ऑक्सीजन कम होने पर निगरानी में दी जाती है।
- कारण के अनुसार दवाएँ: बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन में एंटीबायोटिक दी जा सकती हैं। दिल की बीमारी या फेफड़ों की किसी ख़ून नली में ख़ून जमने पर उसका इलाज करने के लिए अलग दवाएँ दी जा सकती हैं।
- साँस लेने में मशीन से मदद: गंभीर साँस की समस्या में विशेष मास्क या साँस की नली के ज़रिए वेंटिलेटर की मदद दी जा सकती है।
आगे की देखभाल
पुरानी बीमारी हो, तो दवाएँ नियमित लें और फ़ॉलो-अप कराएँ। इनहेलर का सही इस्तेमाल सीखें। डॉक्टर से परेशानी बढ़ने पर मदद लेने की योजना समझें।
धूम्रपान और सिगरेट के धुएँ से बचें।
निष्कर्ष
साँस लेने में तकलीफ़ अचानक बढ़े या बोलने में परेशानी, सीने में दर्द अथवा बेहोशी हो, तो तुरंत सहायता लें। बार-बार होने वाली तकलीफ़ की भी जाँच कराएँ।
सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद, भारत में सर्वोत्तम गहन चिकित्सा अस्पताल, के इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर डॉक्टर लक्षणों की गंभीरता समझकर ज़रूरी जाँच और इलाज की योजना बनाते हैं। वे साँस सँभालने, संबंधित विशेषज्ञ की मदद लेने और आगे की देखभाल पर मार्गदर्शन देते हैं।
लगातार या बार-बार होने वाली परेशानी की जाँच के लिए आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें। इमरजेंसी के संकेत हों, तो अपॉइंटमेंट का इंतज़ार किए बिना नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।