हर बच्चे की बढ़ने की गति अलग होती है। फिर भी लंबाई और वज़न में होने वाला बदलाव उसके स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण जानकारी देता है। बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से कम होना (Bacche Ki Lambai Umar Ke Hisaab Se Kam Hona) परिवार में छोटे कद से जुड़ा हो सकता है। कुछ मामलों में इसकी वजह पोषण की कमी, बीमारी या हार्मोन की समस्या हो सकती है।
केवल दूसरे बच्चों से तुलना करके विकास में देरी का पता नहीं लगाया जा सकता। छोटा दिखने वाला बच्चा सामान्य गति से बढ़ सकता है। वहीं सामान्य लंबाई वाला बच्चा अचानक धीरे बढ़ने लगे तो जाँच ज़रूरी हो सकती है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बच्चों में विकास में देरी के संकेत क्या हैं, बच्चों में लंबाई कम होने के कारण (Bachchon Mein Lambai Kam Hone Ke Karan) कौन-से हो सकते हैं और जाँच व इलाज कब ज़रूरी होता है।
बच्चों का विकास कैसे समझा जाता है?
विकास का मतलब केवल कद नहीं है। इसमें बच्चे की लंबाई, वज़न और समय के साथ बढ़ने की गति देखी जाती है। बच्चों की सामान्य लंबाई उम्र, लिंग और माता-पिता की लंबाई के अनुसार अलग हो सकती है।
लंबाई और वज़न को ग्रोथ चार्ट पर दर्ज करने से बच्चे का पैटर्न समझ आता है। एक बार दर्ज की गई लंबाई के बजाय कुछ महीनों या वर्षों की नाप की तुलना अधिक उपयोगी होती है।
बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से कम होना कब चिंता की बात है?
छोटा कद हमेशा बीमारी नहीं होता। माता-पिता की लंबाई कम हो तो बच्चा भी छोटा हो सकता है। कुछ बच्चों में प्यूबर्टी देर से शुरू होती है और बाद में उनकी लंबाई तेज़ी से बढ़ सकती है।
बच्चे की बढ़ने की गति पहले से धीमी हो जाए या ग्रोथ चार्ट पर उसकी स्थिति लगातार नीचे जाए तो ये बच्चों में वृद्धि की समस्या (Growth Problems in Children) का संकेत हो सकता है। ऐसे में पुराना ग्रोथ रिकॉर्ड देखना ज़रूरी है।
बच्चों में विकास में देरी के संकेत
विकास की समस्या धीरे-धीरे सामने आ सकती है।
इसलिए माता-पिता को इन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए:
- लंबाई धीरे बढ़ना: लंबाई बहुत कम बढ़े या कपड़ों का साइज़ लंबे समय तक लगभग एक जैसा रहे।
- ग्रोथ पैटर्न बदलना: ग्रोथ चार्ट पर बच्चे का स्तर लगातार नीचे जाने लगे।
- वज़न में बदलाव: वज़न ठीक से ना बढ़े या बिना कारण कम होने लगे।
- प्यूबर्टी में देरी: उम्र बढ़ने के साथ होने वाले शारीरिक बदलाव समय पर शुरू ना हों।
- दूसरे लक्षण: थकान, पेट दर्द, दस्त, कब्ज़, भूख कम लगना या बार-बार बीमार पड़ना।
ये संकेत अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर किसी हार्मोन की कमी या दूसरी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
बच्चों में लंबाई कम होने के कारण
बच्चों में शारीरिक विकास की समस्या के कई कारण हो सकते हैं।
उम्र, जन्म से जुड़ी जानकारी, पारिवारिक लंबाई और दूसरे लक्षण संभावित कारण समझने में मदद करते हैं:
- परिवार में छोटा कद: बच्चा छोटा हो सकता है, लेकिन उसकी बढ़ने की गति सामान्य रहती है।
- देर से बढ़ना: कुछ बच्चों में प्यूबर्टी देर से शुरू होती है। इसलिए उनकी लंबाई दूसरे बच्चों की तुलना में बाद तक बढ़ सकती है।
- पोषण की कमी: पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन और पोषक तत्व ना मिलने पर विकास प्रभावित हो सकता है।
- लंबे समय की बीमारी: सीलिएक डिज़ीज़, किडनी, हृदय, फेफड़ों या पाचन की बीमारी विकास को प्रभावित कर सकती है।
- हार्मोन की समस्या: थायरॉइड या ग्रोथ हार्मोन की कमी से लंबाई धीरे बढ़ सकती है। इसकी पुष्टि विशेष जाँच से होती है।
- जन्म या जीन से जुड़ी स्थितियाँ: समय से पहले जन्म, गर्भ में धीमा विकास या कुछ जेनेटिक स्थितियाँ कारण हो सकती हैं।
- कुछ दवाएँ: लंबे समय तक दी जाने वाली कुछ दवाएँ विकास पर असर डाल सकती हैं। दवा अपने आप बंद ना करें। डॉक्टर से इसके लाभ और संभावित प्रभाव के बारे में बात करें।
बच्चों में विकास की जाँच कैसे होती है?
बच्चों में विकास की जाँच लंबाई व वज़न की सही जाँच और मेडिकल जानकारी से शुरू होती है। बाल रोग विशेषज्ञ जन्म के समय की लंबाई व वज़न, पुरानी रिपोर्ट, भोजन, नींद, बीमारी, दवाओं और परिवार के ग्रोथ पैटर्न के बारे में पूछ सकते हैं।
बच्चों की लंबाई और वज़न की जाँच के दौरान लंबाई और वज़न को ग्रोथ चार्ट पर दर्ज किया जाता है। माता-पिता की लंबाई से बच्चे की संभावित लंबाई का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, लेकिन ये केवल एक अनुमान होता है।
ज़रूरत के अनुसार आगे की जाँच में शामिल हो सकते हैं:
- ख़ून की सामान्य जाँच
- थायरॉइड, किडनी, लिवर या सीलिएक डिज़ीज़ से जुड़े टेस्ट
- विकास से जुड़े हार्मोन का आकलन
- बोन एज एक्स-रे, जिससे हड्डियों की बढ़ने की उम्र का अंदाज़ा मिलता है
- ग्रोथ हार्मोन की कमी का शक होने पर विशेष हार्मोन टेस्ट
- कुछ संकेत मिलने पर जेनेटिक जाँच
हर बच्चे को सभी टेस्ट नहीं कराने पड़ते। डॉक्टर ग्रोथ रिकॉर्ड के आधार पर ज़रूरी टेस्ट बताते हैं।
बच्चों में विकास में देरी का इलाज
इलाज कारण पर निर्भर करता है। परिवार में छोटे कद या देर से होने वाली सामान्य विकास में केवल निगरानी की आवश्यकता हो सकती है। पोषण की कमी होने पर डाइट में उचित बदलाव किए जाते हैं।
सीलिएक डिज़ीज़, थायरॉइड या दूसरी बीमारी का इलाज विकास बेहतर करने में मदद कर सकता है। ग्रोथ हार्मोन केवल कुछ स्थितियों में पूरी जाँच के बाद दिया जाता है। इलाज के दौरान निगरानी ज़रूरी है। बिना विशेषज्ञ की सलाह के हार्मोन या सप्लीमेंट ना दें।
बच्चे की लंबाई कैसे बढ़ाएँ?
माता-पिता अक्सर पूछते हैं कि बच्चे की लंबाई कैसे बढ़ाएँ। कोई भोजन, व्यायाम या घरेलू उपाय लंबाई बढ़ने की गारंटी नहीं देता।
फिर भी स्वस्थ आदतें सामान्य विकास में मदद करती हैं:
- उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार संतुलित भोजन दें।
- भोजन में प्रोटीन, अनाज, फल, सब्ज़ियाँ और ज़रूरी पोषक तत्व शामिल करें।
- बच्चे को नियमित खेल और शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करें।
- उम्र के अनुसार पर्याप्त और नियमित नींद सुनिश्चित करें।
- लंबाई को लेकर दूसरे बच्चों से तुलना या मज़ाक ना करें।
- बिना जाँच के लंबाई बढ़ाने वाले पाउडर, दवाएँ या सप्लीमेंट ना दें।
विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?
लंबाई बढ़ने की गति धीमी हो या ग्रोथ चार्ट पर स्तर लगातार नीचे जाए तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। वज़न कम होना, प्यूबर्टी में देरी, पेट की समस्या या लंबे समय की बीमारी भी जाँच की वजह है।
ज़रूरत पड़ने पर बाल एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है। तेज़ सिरदर्द, नज़र में बदलाव या उल्टी भी हो तो जल्द चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष
बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से कम होना हमेशा बीमारी नहीं है। फिर भी विकास धीमा पड़ने पर समय से जाँच कराएँ। कारण पता चलने के बाद बच्चे की ज़रूरत के अनुसार पोषण में बदलाव, नियमित जाँच या इलाज शुरू किया जा सकता है।
सर्वोदय हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद, में बच्चों के विकास, पोषण और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं के लिए जाँच और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध हैं। ये बच्चों का विशेषज्ञ अस्पताल है, जहाँ बाल रोग और बाल एंडोक्राइनोलॉजी से जुड़ी सेवाएँ उपलब्ध हैं।
सही जाँच और इलाज के लिए आज ही बाल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें।