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साइलेंट अटैक के लक्षण क्या हैं और इसे समय रहते कैसे पहचानें

साइलेंट अटैक के लक्षण क्या हैं और इसे समय रहते कैसे पहचानें

आजकल हार्ट अटैक की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि कई बार ये बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के हो जाता है। आमतौर पर लोग हार्ट अटैक को तेज सीने के दर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हर हार्ट अटैक ऐसा नहीं होता। कुछ हार्ट अटैक ऐसे भी होते हैं जिनमें दर्द बहुत हल्का होता है या बिल्कुल महसूस नहीं होता, इन्हें ही साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि साइलेंट अटैक क्या होता है, ये कैसे आता है, क्यों आता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसका समय पर इलाज क्यों जरूरी है।

साइलेंट अटैक क्या होता है?

साइलेंट हार्ट अटैक में दिल की मांसपेशियों को नुकसान तो होता है, लेकिन इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल महसूस नहीं होते। सामान्य हार्ट अटैक में सीने में तेज दर्द, पसीना आना और घबराहट जैसे लक्षण साफ दिखाई देते हैं, जबकि साइलेंट अटैक में ये संकेत या तो बहुत हल्के होते हैं या व्यक्ति इन्हें गैस, थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देता है। साइलेंट अटैक के दौरान दिल तक जाने वाली रक्त आपूर्ति कुछ समय के लिए कम हो जाती है, जिससे दिल की मांसपेशियों को नुकसान होता है।

अक्सर ये देखा गया है कि जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है, उनमें साइलेंट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। नसों की संवेदनशीलता कम होने के कारण उन्हें दर्द महसूस नहीं होता और अटैक “साइलेंट” रह जाता है।

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साइलेंट अटैक क्यों आता है?

दरअसल, साइलेंट हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, बल्कि ये शरीर में लंबे समय से चल रही कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का नतीजा होता है। दिल तक खून पहुँचाने वाली धमनियों में जब धीरे-धीरे रुकावट बनने लगती है, तो दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। साइलेंट अटैक के पीछे कई ऐसे कारण होते हैं जो समय के साथ दिल को कमजोर बना देते हैं।

साइलेंट अटैक के मुख्य कारण हैं:

  • मधुमेह: मधुमेह के मरीजों में नसों की संवेदनशीलता कम हो जाती है, जिससे दर्द महसूस नहीं होता और अटैक साइलेंट रह जाता है।
  • उच्च रक्तचाप: लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना: धमनियों में फैट जमने से रुकावट का खतरा बढ़ जाता है।
  • तनाव और अनियमित जीवनशैली: लंबे समय तक तनाव में रहने से हृदय स्वास्थ्य प्रभावित होती है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी: सक्रिय ना रहने से दिल कमजोर होने लगता है।

साइलेंट अटैक के लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि व्यक्ति उन्हें सामान्य थकान या रोजमर्रा की परेशानी समझकर टाल देता है।

साइलेंट अटैक के कुछ सामान्य लक्षण हैं:

  • सीने में हल्की जकड़न या दबाव महसूस होना
  • बिना ज्यादा मेहनत के थकान लगना
  • सांस फूलना या घबराहट होना
  • चक्कर आना या अचानक कमजोरी महसूस होना
  • जबड़े, कंधे, पीठ या बाएं हाथ में हल्का दर्द

यही वजह है कि अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत हृदय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

साइलेंट अटैक आने पर क्या करें?

अगर बार-बार थकान, सांस फूलना या सीने में अजीब सा दबाव महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

साइलेंट अटैक की आशंका होने पर ये कदम उठाने चाहिए:

  • तुरंत किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें
  • ईसीजी और हार्ट से जुड़े जरूरी टेस्ट कराएं
  • ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा ना लें

सही समय पर इलाज शुरू करने से आगे होने वाले बड़े हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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साइलेंट अटैक का इलाज और जांच

जब किसी व्यक्ति में बार-बार थकान, सांस फूलना या सीने में हल्का दबाव महसूस होता है, तो डॉक्टर सबसे पहले हार्ट से जुड़ी कुछ जरूरी जांच कराने की सलाह देते हैं। इन जांचों से ये पता लगाया जा सकता है कि पहले कभी साइलेंट अटैक जैसी स्थिति हो चुकी है या नहीं।

साइलेंट अटैक की पहचान के लिए की जाने वाली मुख्य जांचें हैं:

  • ईसीजी: इससे दिल की धड़कनों और पुराने हार्ट अटैक के संकेत मिल सकते हैं
  • इकोकार्डियोग्राफी: दिल की मांसपेशियों को हुए नुकसान का पता चलता है
  • ब्लड टेस्ट: कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और कार्डियक एंजाइम्स की जांच
  • स्ट्रेस टेस्ट: ये देखने के लिए कि मेहनत के दौरान दिल कैसे काम कर रहा है

जांच के बाद डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज शुरू करते हैं। इलाज में दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव पर भी विशेष जोर दिया जाता है।

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निष्कर्ष

साइलेंट हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो बिना किसी तेज चेतावनी के दिल को नुकसान पहुँचा सकती है। चूंकि इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अगर आप दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ हृदय अस्पताल (best heart hospital in Delhi NCR) की तलाश में हैं, तो ऐसा अस्पताल चुने जहाँ आधुनिक सुविधाओं के साथ अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हों। सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद, में हृदय रोगों के लिए अत्याधुनिक जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ अनुभवी हृदय विशेषज्ञ मरीज की स्थिति को समझकर व्यक्तिगत इलाज योजना तैयार करते हैं। समय पर की गई जांच और निवारक परामर्श से ना केवल साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान की जा सकती है, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े हार्ट अटैक के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

अगर आपको बार-बार थकान, सांस फूलना या सीने में हल्की जकड़न जैसी समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो इन्हें नजरअंदाज ना करें। सही समय पर जांच और इलाज से दिल की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। अपने दिल का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर अनुभवी नोएडा में हृदय रोग विशेषज्ञ (cardiologist in Noida) से परामर्श जरूर लें

FAQs

साइलेंट हार्ट अटैक अक्सर सुबह के समय या नींद के दौरान हो सकता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव और ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

साइलेंट अटैक तब आता है जब दिल तक जाने वाली रक्त आपूर्ति धीरे-धीरे कम हो जाती है और दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुँचता है, लेकिन व्यक्ति को तेज दर्द महसूस नहीं होता।

साइलेंट अटैक के पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, तनाव और अनियमित जीवनशैली जैसे कारण होते हैं।

अगर साइलेंट अटैक की आशंका हो, तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। ईसीजी और जरूरी हार्ट टेस्ट कराना बेहद जरूरी होता है ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।

अधिकतर हार्ट अटैक सुबह 5 बजे से 11 बजे के बीच होते हैं। इस समय ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में अचानक बदलाव आने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

साइलेंट अटैक के लक्षण हल्की थकान, सांस फूलना, सीने में दबाव, चक्कर आना और कंधे या जबड़े में हल्का दर्द शामिल हो सकते हैं।

Dr. Nitasha Singh | Non-Invasive Cardiology,Cardiac Sciences,Cardiology | Sarvodaya Hospital

Dr. Nitasha Singh
Associate Director & HOD - Non-Invasive Cardiology

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